आप जीने का ढंग सीख लो बस .. ! अगर ईमानदारी से जीए है तो 50 साल के पहले संसार फीका लगेगा ..!
49 साल हो जाए तो विवेक वैराग्य त्रीव पकड़ेगा !
यदि नीयम छूट रहा है या सेवा मे रूचि नही है तो कोई पाप ज़ोर मारा रहा है !
ऐसों का फिर पतन निश्चित है .. ! इससे बचने का उपाय क्या ?
H.H Asharamji Bapu Spiritual Discourse

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